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नियुक्ति की मांग पर स्वास्थ्य भवन पर नर्सों का हल्लाबोल

तीन साल से ठप भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ सड़क पर उतरीं अभ्यर्थी

20 Feb 2026

नियुक्ति की मांग पर स्वास्थ्य भवन पर नर्सों का हल्लाबोल

कोलकाता। सरकारी अस्पतालों में नर्सों की भारी किल्लत और पिछले तीन वर्षों से अटकी भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ प्रशिक्षित नर्सों ने एक बार फिर ममता सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में नर्सिंग परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थी राजधानी की सड़कों पर उतरे और लंबित नियुक्ति पत्रों को जारी करने व पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर सॉल्टलेक स्थित स्वास्थ्य भवन के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। 
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे हटने वाली नहीं हैं। इस विरोध प्रदर्शन में वर्ष 2018-19 से लेकर हालिया 2025-26 सत्र तक की नर्सिंग परीक्षा पास कर चुकीं प्रशिक्षित अभ्यर्थी शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एक तरफ राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के अनुपात में नर्सों की संख्या मानक से काफी कम है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति देने में टालमटोल कर रही है। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने स्वास्थ्य निदेशक को एक ज्ञापन सौंपकर अविलंब कार्रवाई की मांग की है। 
नर्सेस यूनिट की सचिव भास्वती मुखर्जी ने प्रशासन पर वादाखिलाफी और आंकड़ों में बाजीगरी करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले 7,000 नर्सों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिससे हजारों बेरोजगार युवाओं में उम्मीद जगी थी। लेकिन जब स्वास्थ्य भवन द्वारा अंतिम चयन सूची प्रकाशित की गई, तो उसमें मात्र 5,000 से कुछ अधिक नाम ही शामिल थे। यानी बिना किसी तार्किक कारण के लगभग डेढ़ हजार से ज्यादा पद कम कर दिए गए, जो सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। 
प्रदर्शनकारी नर्सों ने निजी शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि निजी कॉलेज भारी-भरकम फीस लेकर हर साल हजारों नर्सों को प्रशिक्षित कर रहे हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। मेरिट सूची में स्थान पाने के बावजूद सैकड़ों अभ्यर्थी महीनों से हाथ में डिग्री लेकर नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं। भास्वती मुखर्जी ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक विज्ञापन के अनुरूप सभी रिक्त पदों को नहीं भरा जाता और चयनित उम्मीदवारों को तत्काल कार्यभार ग्रहण (ज्वॉइनिंग) नहीं कराया जाता, उनका यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। 

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